मिडिल क्लास

मिडिल क्लास
कोई क्लास नही
वरन
निर्वासितों के लिए – घोषित
शब्द समूह है
जो –
ना तो ही जी सकते है
ना ही मौत का संधान
उपहास के पात्र-मात्र
ये लोग
नित नए दैनिक उपयोगी-
अविष्कारों के जनक हैं
जैसे-
सपनों को भूलने के लिए-
अनुवांशिक जिम्मेदारियों का निर्वहन
अपनो को भूलने के लिए-
गैरों से उधारी बरकरार रखना
गाँवों को भूलने के लिए-
शहरों का खालीपन स्वीकारना
एक दिन की किटी-पार्टी के लिए-
महीनों तक राशन की बचत करना
हर छोटी-बड़ी गलतियों पर-
फ़ौरन माफ़ी मांग लेना
चाहे गलती अपनी हो या सामने वाले की
इत्यादि
पूर्ण सफल अनुसंधानकर्ता है…
परन्तु
सरकारों से बिना कोई लाभ-
प्राप्त करे बराबर कर(tax ) देना,
सामाजिक अन्याय को अपनी-
नियति समझ सहज स्वीकार लेना,
प्रजातंत्र में पूर्णतः उपेक्षित-
राजनीति से कोसो दूर-
पर
माँ-बाप का ख़्याल,
स्त्री की माँगपूर्ती,
बच्चों की जरूरतें,
घर की साख़,
रिश्तों का बोझ ,
समाज का संचालक करता-
ग़मज़दा मिडिल क्लास-
दुःखो का पिटारा होते हुए भी,
चेहरे पर मुस्कान सजाकर सदैव
(राम-भरोसे)चलता ही रहता है..

(हे! अधर्मी कौरवों की भरी सभा में बिलखते धर्म के लिए लड़ता अज्ञात विकर्ण-तुम्हारी जय हो ! तुम्हारी जय हो!! )
                                    @सचिन

2 thoughts on “मिडिल क्लास

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